
नगर पंचायत दिलदारनगर में अजूबा पक्के स्लैब के नीचे कच्चे मकान में रहने को मजबूर सफाई कर्मचार
उत्तर प्रदेश सरकार के द्वारा चलने वाली सरकारी विभागों में अजब गजब के मामले भी सामने आते रहते हैं । ऐसा ही मामला दिलदारनगर नगर पंचायत से भी आया है जहां पर सफाई कर्मियों के लिए आवास बनाने करीब 36 लाख रुपए की बजट आया और कार्यदाई संस्था या फिर ठेकेदार के द्वारा आवास की जगह मात्र पिलर देकर उसके ऊपर छत की ढलाई कर कर्तव्य की इति श्री कर दी गई। उसका पूरा का पूरा भुगतान भी नगर पंचायत के द्वारा कर दिया गया वहीं अब इस अधूरे आवास में सफाई कर्मचारी अस्थाई कच्चा घर बनाकर रहने को मजबूर हैं।
गाजीपुर में अजूबो की कोई कमी नहीं है और ऐसा ही अजूबा नगर पंचायत दिलदारनगर में देखने को मिल रहा है। जहां पर स्लैब डाली हुई छत के नीचे कच्चा मकान बनाकर सफाई कर्मचारी पिछले 10 सालों से रहने को मजबूर है। पूरा मामला अब हम आपको बता देते हैं साल 2014 में नगर विकास योजना के अंतर्गत कर्मचारियों के रहने के लिए करीब एक करोड़ की लागत से आवास बनाए जाने की योजना आई। और इस योजना के तहत तत्कालीन अधिशासी अधिकारी और नगर पंचायत अध्यक्ष के द्वारा नगर पंचायत को प्राप्त प्रथम किस्त के तहत करीब 37 लाख रुपए का टेंडर कर कार्य प्रारंभ कराया गया। और उस टेंडर के तहत ठेकेदार ने मात्र पिलर देकर छत की ढलाई कर दिया। इसके बाद नगर पंचायत दिलदारनगर के द्वारा साल 2016 में उक्त ठेकेदार को पूरा भुगतान भी कर दिया।
नगर पंचायत के द्वारा सफाई कर्मचारियों के लिए छत की ढलाई कर देने के बाद सफाई कर्मियों को अब यह उम्मीद हो गई कि अब उन्हें रहने को आवास मिलेगा । लेकिन जब कई साल बीत गए और आवास नहीं बना तब सफाई कर्मियों ने इस पक्के स्लैब के नीचे अपना कच्चा मिट्टी का घर बनाकर रहना आरंभ कर दिया जो आज तक इस हालत में रहते चले आ रहे हैं । लेकिन उनके योजना के तहत बनने वाले आवास का सपना सपना ही रह गया।
बता दे की नगर पंचायत दिलदारनगर में मौजूदा समय में 12 रेगुलर सफाई कर्मचारी हैं, जबकि 17 संविदा के और 22 आउटसोर्सिंग कर्मचारी नगर पंचायत इलाके की सफाई की व्यवस्था देखते हैं।और इसमें से अधिकतर इसी स्लैब के नीचे अपनी कच्चा मकान बनाकर रहने को मजबूर हैं।
दिलदारनगर नगर पंचायत के वार्ड नंबर 10 में बनाया गया यह आवास जो आवास विहीन है और कच्चे मकान में सफाई कर्मचारी रहने को मजबूर है। इसकी शिकायत भी कई बार किया गया जिसकी शिकायत पर जिलाधिकारी और एसडीएम के द्वारा जांच भी किया गया। लेकिन उसमें आज तक क्या हुआ किसी को पता नहीं चल पाया।
मामला साल 2014 का था और उस वक्त अली शेर राईनी उर्फ भोलू नगर पंचायत अध्यक्ष रहे । उनसे इस योजना के बारे में बात की गई तो उन्होंने बताया कि नया सवेरा योजना के तहत नगर पंचायत की जो जमीन थी उस पर सफाई कर्मचारियों के आवास बनाने के लिए प्रथम किस्त में जो बजट आया उसका टेंडर कर दिया गया। और ठेकेदार ने प्रथम किस्त के अनुसार अपना काम भी कर दिया। वहीं दूसरी किस्त के बजट के लिए शासन को लिखा गया और उसके बाद हमारा कार्यकाल खत्म हो गया। और उसके बाद बनने वाले अध्यक्ष और अधिशासी अधिकारियों ने इस योजना को पूर्ण करने के लिए कोई दिलचस्पी नहीं लिया। जिसके कारण आज तक नगर पंचायत दिलदारनगर के सफाई कर्मचारी पक्के स्लैब के नीचे कच्चे मकान में रहने को मजबूर हैं।
वही इस मामले पर नगर पंचायत दिलदारनगर के अधिशासी अधिकारी संतोष कुमार से जब बात की गई तब उन्होंने कहा कि उन्हें इस तरह के किसी भी योजना या फिर आवास के बारे में कोई जानकारी नहीं है। इसके बारे में जानकारी लेने के बाद ही कुछ बता पाएंगे।